जीवाणु आवरण सोपान
जलतापीय छिद्र

जीवाणु आवरण सोपान

समुद्र की तलहटी में, जहाँ सूर्य की एक भी किरण नहीं पहुँचती और जल का भार हज़ारों मीटर की गहराई का बोझ उठाए खड़ा है, ज्वालामुखीय बेसाल्ट की सीढ़ीदार चट्टानें श्वेत जीवाणु-आवरणों से ढकी हुई हैं — मानो गीले रेशम की चादरें अँधेरे पर बिछा दी गई हों। विसरित उद्गार-छिद्रों से निकलता ऊष्ण जल इन चटाइयों के किनारों को कँपाता है, और उनके चारों ओर एक मोतियाई खनिज धुंध तैरती रहती है जो पत्थर को धुँधलाहट में घोल देती है। दूर खड़े श्याम धूम्र-स्तंभ सघन प्लूम उगलते हैं जिनकी परिधि पर रासायनिक संदीप्ति की नारंगी-लाल आभा और नव-विदीर्ण चट्टान की तापीय दीप्ति मिलकर एक अलौकिक प्रकाश रचती है — यही इस संसार का एकमात्र सूर्य है। इस रासायनिक संश्लेषण पर आधारित पारिस्थितिकी में श्वेत क्लैम शैलखंडों की दरारों में सिमटे हैं, पीली Riftia नलिका-कृमि दरारों से ऊपर उठती हैं, और हिममानव केकड़े ऊष्म हाशियों पर चिपके हैं — एक संपूर्ण जीवंत जगत, जो बिना किसी साक्षी के, अपनी ही शर्तों पर, युगों से अस्तित्व में है।

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