समुद्र की सतह से लगभग ग्यारह किलोमीटर नीचे, जहाँ जल का भार लगभग 1,100 वायुमंडलीय दाब के बराबर है, सिरेना डीप की खाई-तली पर विशाल कोणीय शिलाखंड लोहे से समृद्ध लाल गाद में आधे धँसे पड़े हैं — ये खंड मारियाना ट्रेंच की विवर्तनिक हलचलों का मूक प्रमाण हैं, जहाँ प्रशांत प्लेट फिलीपीन प्लेट के नीचे अनवरत खिसकती रहती है। इन शिलाओं की दरारों में धागे जैसी श्वेत सूक्ष्मजीवीय झिल्लियाँ फैली हैं, जो रसायन-संश्लेषण पर जीवित रहती हैं और इस प्रकाशहीन संसार में ऊर्जा के एकमात्र स्वतंत्र स्रोत का प्रतिनिधित्व करती हैं। तल पर कुछ कोमल, पीलापन लिए हडल होलोथुरिया — समुद्री खीरे — मंद गति से लाल अवसाद पर चलते हैं, उनके शरीर की रूपरेखा कभी-कभी किसी अज्ञात जीव की दूरस्थ पन्नई जैव-प्रदीप्त चमक से क्षणभर के लिए उजागर होती है, फिर अंधकार में विलीन हो जाती है। ऊपर से हिमशीतल जल में तैरते हुए समुद्री हिमकण — मृत जीवों और कार्बनिक कणों का यह मंद वर्षण — ही यहाँ के जीवन का एकमात्र भोजन-स्रोत है, और यह संसार, इस असीम दबाव व भूगर्भीय स्थिरता में, बिना किसी साक्षी के, अपनी आदिम लय में अनादि काल से श्वास लेता रहा है।