भूमध्य सागर की उथली तटीय जल में, जहाँ गहराई मात्र पाँच से आठ मीटर है, दोपहर का सूर्यप्रकाश जल की सतह को भेदकर मृदु स्वर्णिम किरणों और चलायमान प्रकाश-जाल के रूप में नीचे उतरता है, और *Posidonia oceanica* की लंबी फीताकार पत्तियाँ उस प्रवाह में एक साथ लहराती हैं, जैसे किसी अनदेखी श्वास से जीवित हो उठी हों। इस हरे-भरे समुद्री घास के मैदान के मध्य में एक अंडाकार घाव उभरता है — कच्ची, उजागर बालू की एक पट्टी जहाँ प्रकंद और तंतुमय जड़ें भूमि से उखड़कर दिखाई देती हैं, उस स्थान की गवाह जहाँ समुद्रतल की जीवित परत अचानक समाप्त हो जाती है। टूटी हुई पत्तियाँ और पर्णखंड इस रिक्त बालुई अंतराल को धीरे-धीरे पार करते हैं, जबकि सूर्यप्रकाश में नहाई कुछ पत्तियों पर सूक्ष्म ऑक्सीजन बुलबुले चमकते हैं — प्रकाश-संश्लेषण की मौन साक्ष्य। इस अक्षत हरित सीमा पर किशोर मछलियाँ — चाँदी-सी सी ब्रीम, नन्हे रैस, और पत्तियों के बीच धागे की तरह बुनी पाइपफिश — घनी छतरी में आश्रय खोजती हैं, क्योंकि यह समुद्री घास का मैदान उनके लिए शैशव का संरक्षणस्थल है, जहाँ अर्धपारदर्शी झींगे पत्तियों के निकट तैरते हैं और जलस्तम्भ में सूक्ष्म समुद्री हिम अनंत नीले-हरे जल में तिरती रहती है।