रोशनी में एंगलर
शाश्वत रात

रोशनी में एंगलर

सबमर्सिबल के आगे लगे संकरे प्रकाश-पुंज में, जहाँ रोशनी अचानक अंधेरे में विलीन हो जाती है, एक मादा एंगलरफ़िश बिल्कुल निश्चल जल-स्तंभ में टँगी हुई है — जैसे इस शून्य की वह स्वयं एक कृति हो। उसके सिर पर लहराता नीला बायोल्यूमिनेसेंट प्रलोभन एक ठंडी, स्पंदित रोशनी से झिलमिलाता है, जो प्रत्येक क्षण उसकी पारदर्शी त्वचा और भीतर की धुँधली संरचना को उजागर करता है और फिर उसे अंधकार में निगल लेता है। यहाँ जल का तापमान मुश्किल से दो से चार डिग्री सेल्सियस है और दबाव सतह से सैकड़ों गुना अधिक — इतना कि इस गहराई तक सूर्य का एक भी फ़ोटॉन नहीं पहुँच सकता, जिसके कारण जीवन यहाँ प्रकाश-संश्लेषण से नहीं, बल्कि शिकार, रासायनिक ऊर्जा और जैव-प्रकाश की चालाकी से चलता है। प्रकाश-पुंज में धीरे-धीरे बहता 'मरीन स्नो' — जैविक कणों और मृत कोशिकाओं की वह अनंत बारिश — इस जल-स्तंभ की असीम गहराई और उसकी अटूट एकाकी चुप्पी की याद दिलाता है, और उन सुई-जैसे दाँतों पर पड़ता सबमर्सिबल का क्षणिक प्रकाश यह स्पष्ट कर देता है कि यहाँ हर मुलाकात — शिकार की हो या वैज्ञानिक की — एक संयोग से कम नहीं।

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