चर्बी पर पहली दावत
व्हेल पतन

चर्बी पर पहली दावत

समुद्र की सतह से लगभग ढाई किलोमीटर नीचे, जहाँ दाब इतना प्रचंड है कि वह हर दिशा से हड्डियों को भींचता है और जल का तापमान मुश्किल से दो-तीन डिग्री से ऊपर रहता है, एक विशाल व्हेल का शव हाल ही में सिल्ट के मैदान पर आ टिका है — और यह मैदान, जो सदा भूख से व्याकुल रहता है, अब अपने दुर्लभ वैभव को पहचान चुका है। उसके फटे हुए बाजू से हाथीदाँत-सी मोटी चर्बी की चादरें और गहरे लाल माँस की परतें उघड़ी पड़ी हैं, और स्लीपर शार्कें — भारी, भूतिया, पथरीली-स्लेटी — उस देह के इर्द-गिर्द धीमे वृत्त काटती घूम रही हैं, जैसे ग्रह अपने किसी अंधे सूर्य की परिक्रमा करते हों। हैगफ़िशें घावों के भीतर रस्सियों की तरह गुँथी हुई हैं, श्लेष्मा से लथपथ, देह में धँसी हुई, और जब-जब कोई मेहतर उस सिल्ट को उड़ाता है, तो परेशान जीवों की जैवदीप्ति से ठंडी सियान-नीली-हरी चमकें फूटती हैं — एक क्षण के लिए चर्बी की हर सिलवट, त्वचा की हर धार, मिट्टी के हर निशान को रोशन करती हैं, और फिर वापस उस अथाह काले जल में लीन हो जाती हैं। यह वह क्षण है जिसे समुद्रविज्ञान स्मिथ और बाको के उत्तराधिकार-क्रम का पहला चरण कहता है — शव-भोज — जो आने वाले दशकों की रासायनिक और जैविक उथलपुथल की नींव रखता है, और जो बिना किसी साक्षी के, इस निरंतर, पवित्र अंधकार में चलता रहता है।

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