गहरी प्रवाल ढलान
मूंगे की चट्टान

गहरी प्रवाल ढलान

समुद्र की उस गहराई में, जहाँ सूर्य का प्रकाश केवल एक धुंधली नीलिमा बनकर रह जाता है, चूना पत्थर की ढलान पर प्लेट मूंगे एक-दूसरे के ऊपर परत-दर-परत बिछे हैं — जैसे किसी प्राचीन पुस्तकालय के पन्ने, करोड़ों वर्षों की कैल्शियम कार्बोनेट की स्मृति को संजोए हुए। यहाँ जल का दाब सतह से कई गुना अधिक है, तापमान उष्णकटिबंधीय उथले जल से कहीं शीतल है, और प्रकाश की वह अंतिम नीली-हरी किरणें केवल प्लेटों की ऊपरी सतहों को छूकर उनके निचले भाग को इंडिगो अंधकार में छोड़ देती हैं। मूंगे की इन पतली, नाज़ुक कगारों के बीच कोड़े जैसे व्हिप कोरल और गोर्गोनियन एक धीमी, अनवरत जलधारा में एक ही दिशा में झुके हैं, मानो किसी अदृश्य संगीत की लय पर नृत्य कर रहे हों। स्पंज के छोटे-छोटे टुकड़े, क्रस्टोज़ कोरलाइन शैवाल की परतें, और आश्रय की तलाश में प्लेटों से लगे छोटे मछलियाँ इस पारिस्थितिकी की सूक्ष्म जटिलता को प्रकट करती हैं — यह संसार हमारी उपस्थिति से बिल्कुल बेपरवाह, अपनी ही गहन निस्तब्धता में अनंत काल से अस्तित्वमान है।

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