समुद्र की सतह से सैकड़ों मीटर नीचे, जहाँ सूर्य का प्रकाश धीरे-धीरे एक हल्की नीली आभा में बदलकर अंधकार में विलीन हो जाता है, वहाँ जल का एक ऐसा जगत विद्यमान है जो न तो पूर्णतः प्रकाशित है और न ही पूर्णतः अंधकारमय। इस संधि-क्षेत्र में, जहाँ दाब दसियों वायुमंडल से भी अधिक होता है और तापमान तेज़ी से गिरता है, लालटेन-मछलियाँ अपने फ़ोटोफ़ोर्स की पंक्तियों से क्षणिक नीली-हरी चमक बिखेरती हैं — ये जैव-दीप्ति शिकार को भ्रमित करने, साथियों को संकेत देने, और नीचे से आने वाले शिकारियों की दृष्टि से ओझल होने का माध्यम है। विपरमीन की पतली, पारदर्शी देहें और क्रस्टेशियन के काँच-जैसे शरीर ऊपर से छनकर आती अवशिष्ट नीली रोशनी में मुश्किल से दिखते हैं, उनके चारों ओर समुद्री हिमकण — मृत कार्बनिक पदार्थ के सूक्ष्म कण — मंद गति से नीचे की ओर बहते हैं, जो महासागरीय कार्बन-चक्र की एक अनवरत, अदृश्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यह विशाल, शांत जलस्तंभ किसी साक्षी की प्रतीक्षा नहीं करता — यह अपने नियमों से, अपनी गति से, अपने प्रकाश से जीवित है।