समुद्र की सतह से लगभग पाँच किलोमीटर नीचे, जहाँ दाब चालीस से साठ मेगापास्कल तक पहुँचता है और जल का तापमान मुश्किल से दो डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहता है, क्लेरियन-क्लिपर्टन क्षेत्र की विस्तृत अतल मैदान में मैंगनीज़ और लोहे से भरपूर काले गोलाकार पिंड — पॉलीमेटैलिक नोड्यूल — लाखों वर्षों की अत्यंत मंद रासायनिक अभिवृद्धि से बने, हल्के धूसर-भूरे अवसाद में अर्धनिमग्न बिखरे पड़े हैं। इन्हीं नोड्यूलों के ऊपर डंठलधारी क्रिनॉइड — जीवित जीवाश्म जैसे जीव, इकाइनोडर्म वंश के — अपनी नाज़ुक पंखनुमा भुजाएँ जल में उठाए खड़े हैं, मरीन स्नो के सूक्ष्म कणों को छानकर पोषण ग्रहण करने की सदियों पुरानी प्रक्रिया में संलग्न, उनके पिनुल्स हल्के क्रीम और मटमैले अम्बर रंग में फीकी नीली-सियान जैवदीप्ति की क्षणिक चमक से रेखांकित होते हैं जो गुज़रते प्लैंकटन से उत्पन्न होती है। यह विशाल, मौन, और लगभग अपरिवर्तित संसार — जहाँ मिट्टी में जमा एक मिलीमीटर की परत सहस्राब्दियों का इतिहास समेटे होती है — बिना किसी साक्षी के, अपनी ही लय में, अंधकार और असीम दबाव के बीच सदा से विद्यमान रहा है।