नीले में कंघी जेलीफ़िश
गोधूलि क्षेत्र

नीले में कंघी जेलीफ़िश

विशाल खुले महासागर की जल-स्तंभ में, जहाँ दो सौ से एक हज़ार मीटर की गहराई के बीच सूर्य का प्रकाश धीरे-धीरे एक क्षीण नीली आभा में घुलता जाता है, कई टेनोफोर — कंघी-जेली — अपनी लगभग अदृश्य उपस्थिति के साथ जल में तैरते हैं, जैसे काँच से बने भूत। इनके पारदर्शी पालियाँ और कोमल जिलेटिनी आवरण केवल ऊपर से आती हुई उस फीकी नीलिमा में रेखांकित होते हैं, जो कोबाल्ट नीले से गहरे अल्ट्रामेरीन में और फिर लगभग घने अंधकार में विलीन हो जाती है। इनके कंघी-पंक्तियों — सिलिया की उन समानांतर पट्टियों — पर समय-समय पर हल्की नीली-हरी जैव-दीप्ति की छोटी-छोटी स्फुलिंगें दौड़ती हैं, जो इनकी सुंदर संरचना को एक पल के लिए प्रकट करती हैं और फिर अंधेरे में खो जाती हैं — यह प्रकाश न शिकारी को आकर्षित करने के लिए है, न किसी को दिखाने के लिए, बल्कि यह उस गहन एकांत का स्वयंभू स्वर है। जल में बिखरे समुद्री हिमकण — मृत कोशिकाओं, मल-कणों और खनिज अवशेषों का वह धीमा बहाव जिसे "marine snow" कहते हैं — इस स्तंभ में निस्तब्धता और अपार दबाव की गवाही देते हुए नीचे की ओर सरकते रहते हैं, इस संसार में जो बिना किसी साक्षी के, बिना किसी प्रयोजन के, सदा से अस्तित्व में है।

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