समुद्र की अथाह गहराइयों में, जहाँ जल का भार सैकड़ों वायुमंडलीय दबावों में परिवर्तित हो जाता है और तापमान मुश्किल से दो या तीन अंश सेल्सियस से ऊपर उठता है, एक विशाल सिल्टी मैदान पर मलाईदार रंग की सी-पेन कालोनियाँ एक मंद गहरी धारा में एक ओर झुकी हैं — उनके कोमल पॉलिप्स और मांसल डंठल किसी अदृश्य आघात-तरंग की प्रतिध्वनि में काँप रहे हैं। ऊपर, अँधेरे जल-स्तंभ में, एक स्पर्म व्हेल (*Physeter macrocephalus*) और एक विशालकाय स्क्विड (*Architeuthis dux*) के बीच भीषण संघर्ष ने क्षणिक फ़िरोज़ी-नीली बायोल्युमिनेसेंट चमकें उत्पन्न की हैं, जो हुक लगे चूषक-वलयों की ज्यामिति और व्हेल की पूँछ के विशाल चाप को क्षण-भर के लिए अंकित करके पुनः अंधकार में विलीन हो जाती हैं। उस संघर्ष से टूटे हुए कण — जैविक हिमपात की एक बारीक चादर — धीरे-धीरे नीचे उतर रहे हैं और समुद्री तल की शांत सतह पर बिखरे मैंगनीज पिंडों के पास सूक्ष्म जीवन-रूपों को एक दुर्लभ पोषण-वर्षा की सूचना दे रहे हैं। यह संसार न किसी की प्रतीक्षा करता है, न किसी को जानता है — यहाँ केवल दबाव है, शीत है, और जीवन की वह अदम्य चमक है जो लाखों वर्षों से इसी निर्जन अँधेरे में स्वयं के लिए जलती आई है।