विशालकाय स्क्विड का सुरक्षात्मक प्रस्फुटन
स्पर्म व्हेल और विशाल स्क्विड

विशालकाय स्क्विड का सुरक्षात्मक प्रस्फुटन

समुद्र की उस अतल गहराई में, जहाँ सूर्य का एक भी कण कभी नहीं पहुँचता, एक विशालकाय कोलोसल स्क्विड अपनी बरगंडी-काली भुजाओं को तारे की तरह फैलाकर एक भीमकाय शुक्राणु व्हेल के सामने अपना रक्षा-विस्फोट रचता है — दोनों प्राणी 400 से 600 वायुमंडलीय दबाव के बीच निलंबित हैं, जहाँ जल का प्रत्येक अणु उनके शरीर को अपनी अदृश्य मुट्ठी में थामे हुए है। व्हेल की स्लेटी-भूरी त्वचा पर गोलाकार चूषक-चिह्न और पुराने घावों की रेखाएँ उन अनगिनत संघर्षों की मूक गवाही देती हैं जो इस अँधेरे में पीढ़ियों से होते आए हैं, जबकि स्क्विड के क्रोमेटोफोर्स भय और क्रोध के रंगों में गहरे मदिरा-कृष्ण रंग ग्रहण कर लेते हैं। आस-पास के गहरे सागरीय झींगों और सूक्ष्म प्राणियों से निकलती नीली-सियान चेतावनी-चमक क्षण भर के लिए स्क्विड की हुक-जड़ित भुजाओं और व्हेल के घायल बाजू को जीवित प्रकाश की भाषा में रेखांकित कर देती है — यही जैव-संदीप्ति इस संसार की एकमात्र रोशनी है। समुद्री हिम के बारीक कण — मृत जीवों, मल-कणों और खनिज धूल की वह अनंत बारिश जो ऊपरी जल से अनवरत नीचे झरती रहती है — इस युद्ध के चारों ओर निर्विकार भाव से तैरती रहती है, मानो यह विशाल और मूक ब्रह्मांड किसी साक्षी की प्रतीक्षा किए बिना, अपने भीतर ही, सदा से अस्तित्वमान रहा हो।

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