जेली तरंग घास
समुद्र की सतह के ठीक नीचे, जहाँ सूर्य का प्रकाश लहरों से छनकर नीले-चाँदी रंग की एक चमकती छत बनाता है, वहाँ *Aurelia aurita* — चंद्र जेलीफ़िश — का एक विशाल समूह मंद गति से तैर रहा है, जैसे किसी अनंत घास के मैदान में पारदर्शी फूल झूम रहे हों। इन जीवों के घंटीनुमा शरीर — जिनके भीतर चार पंखुड़ियों जैसी प्रजनन ग्रंथियाँ हल्की दूधिया आभा में दिखती हैं — सौर किरणों के कोमल प्रवणताओं को अपने भीतर से गुज़रने देते हैं, जिससे जल-स्तंभ एक जीवंत नीलम-सा दमकता प्रतीत होता है। यह एपिपेलाजिक जगत प्रकाश-संश्लेषण का केंद्र है, जहाँ सूक्ष्म पादप-प्लवक (phytoplankton) समुद्र की जैविक उर्वरता की नींव रखते हैं और जहाँ दाब अभी मात्र कुछ वायुमंडलों तक सीमित है। महीन निलंबित कण और प्लवक के कण धीमी वृत्ताकार धाराओं में बहते हुए इन जेलीफ़िश के इर्द-गिर्द घूमते हैं, जो इस विशाल, खुले, और नितांत एकान्त जलराशि की गहराई, पारदर्शिता और जीवन की निरंतर धड़कन को मौन रूप से प्रकट करते हैं।

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