समुद्र की सतह के ठीक नीचे, सूर्य का प्रकाश सुनहरे-भूरे केल्प के लंबे डंठलों से होकर छनता है और चट्टानी तल पर थिरकती हुई चकाचौंध की लकीरें बनाता है — इस उथले किंतु घने वन में दबाव मात्र दो से तीन वायुमंडल है, फिर भी जीवन की सघनता अतुलनीय है। छत्र में एक अंडाकार रिक्तस्थान से शुद्ध कोबाल्ट और फ़िरोज़ी आकाश-जल झिलमिलाता है, जहाँ सूर्य की किरणें सीधी उतरकर जलस्तंभ में घुलती हैं और निलंबित प्लवकों तथा कार्बनिक कणों को सूक्ष्म चमक से भर देती हैं — यही प्रकाश-संश्लेषण का वह प्रमुख क्षेत्र है जहाँ समुद्री उत्पादकता का आधार रचा जाता है। चट्टानी शेल्फ़ पर गुलाबी कोरलाइन शैवाल की परत चढ़ी है और उसके ऊपर चमकते नारंगी गैरिबाल्डी — *Hypsypops rubicundus* — स्थिर तैरते हैं, उनका रंग ठंडी छाया और उज्ज्वल नीलिमा के बीच दहकते अंगारे की तरह उभरता है। केल्प के वायु-कोश — न्यूमेटोसिस्ट — जल में प्लवनशीलता बनाए रखते हुए डंठलों को ऊर्ध्वाकार थामे रहते हैं, और इस पूरे प्रकाशित जल-वन में कोई साक्षी नहीं, केवल समुद्र अपने नियमों से, अपनी लय में, सदा की तरह जीवित है।