समुद्र की सतह से कुछ ही दूरी नीचे, एक प्राचीन ज्वालामुखी पर्वत का बेसाल्टी शिखर प्रशांत नीले जल में डूबा हुआ है, जहाँ दोपहर का सूर्य-प्रकाश तिरछी सीढ़ियों की भाँति उतरकर कठोर चट्टानी सतह पर चलायमान कॉस्टिक जालियाँ बुनता है। यह शिखर एपिपेलाजिक मंडल में स्थित है — प्रकाश की पहुँच वाला वह क्षेत्र जहाँ दाब अपेक्षाकृत कम है और जल में ऑक्सीजन प्रचुर — फिर भी यहाँ का ज्वालामुखीय आधार करोड़ों वर्षों की भू-हलचल का मौन साक्षी है, जिसकी खुरदरी सतह पर नारंगी संलग्न शैवाल-वृद्धि और मूँगे के पीले-श्वेत ठूँठ फैले हैं। प्रबल अनुप्रवाह इस पर्वत-शिखर के ऊपर से अनवरत बहता रहता है, प्लवक को संकेंद्रित करता हुआ, और इसी समृद्धि के कारण चाँदी-सी दमकती ट्रेवेली मछलियों का एक घना वृत्तकार झुंड सूर्यकिरणों में दर्पण-सा चमकते हुए शिखर के ऊपर परिक्रमा करता है। शिखर का किनारा एकाएक कोबाल्ट नीले गहरे जल में ढलकता है, जहाँ गहरे रिम पर गॉर्गोनियाई और काले मूँगे की शाखाएँ धारा की दिशा में झुककर इस एकाकी समुद्री मरूद्यान के अस्तित्व की घोषणा करती हैं — एक संसार जो बिना किसी साक्षी के, अपनी पूर्ण निस्तब्धता में, युगों से जीवित है।