नेफेलॉइड परत की सीमा
महाद्वीपीय ढलान

नेफेलॉइड परत की सीमा

समुद्र की सतह से ६९० मीटर नीचे, जहाँ सूर्य का प्रकाश एक क्षीण, नील-बैंगनी आभा के रूप में ही शेष रहता है, महाद्वीपीय ढलान की तलछट एक मौन और विशाल संसार को आधार देती है। यहाँ की हेमीपेलाजिक मिट्टी तरंगित रेखाओं में बिछी है, जिस पर नेफेलॉइड परत का एक धुँधला आवरण — सूक्ष्म गाद और निलंबित कणों से बना — तल के निकट एक प्रवाहमान धुंध की भाँति खिसकता रहता है, और इसी धुंध में समुद्री बर्फ के कण निरंतर, निर्बाध बरसते हैं। ब्रिटलस्टार अपनी लचीली भुजाएँ जलधारा में उठाए तलछट की लहरों पर बिखरे हैं, जबकि श्वेताभ सी-पेन आधे कीचड़ में समाए, अपने कोमल शरीरों को धारा की दिशा में झुकाए खड़े हैं — ये जीव लगभग ५० वायुमंडल से अधिक दबाव में जीवन की सूक्ष्म लय को थामे हैं। कहीं-कहीं तल में छोटे बिलों के द्वार और मलोत्सर्जन के गुच्छे दिखते हैं, जो अदृश्य बेंथिक जीवन की गवाही देते हैं, और दूर जल-स्तंभ में बिखरे प्लवक की विरल, ठंडी जैव-दीप्ति के कुछ कण एक क्षण को टिमटिमाकर फिर अंधकार में विलीन हो जाते हैं — यह संसार हमारे अस्तित्व से पूर्णतः निरपेक्ष, अपनी गहन, हिमशीतल नीरवता में सदा से चलता आया है।

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