समुद्र के इस अतल अंधकार में, जहाँ दाब इतना प्रचंड है कि जल स्वयं एक अदृश्य शिला की भाँति भारी हो जाता है, एक मध्य-महासागरीय कटक की खड़ी बेसाल्ट भ्रंश-दीवार ऊपर उठती है — ताज़े पिलो-लावा की काली कांचीय सतहों से बनी, जहाँ पृथ्वी की आंत्रिक ऊष्मा अभी भी दरारों से रिसती है और एक धुंधला नारंगी-लाल रासायनिक-दीप्त ऊष्मीय प्लूम उस दीवार पर चढ़ता है जैसे किसी पाताली अग्नि का स्मरण हो। उसी प्लूम के मंद प्रकाश के विरुद्ध, एक वाइपरफ़िश अपनी लंबी, तनी हुई देह के साथ जल में निश्चल झूलती है — उसके सूई-जैसे दाँत और विशाल जबड़े केवल एक तीखी काली रेखा के रूप में दृश्यमान हैं, जो उस धुँधली आभा के सामने उभरती है। जल-स्तंभ में बिखरे सियान और नील-हरित जैव-संदीप्त कण गहराई को आयाम देते हैं, जबकि खनिज-युक्त हिम-कण और सूक्ष्म समुद्री हिमपात धीरे-धीरे निर्जन शीतल जल में तैरते रहते हैं। यह संसार किसी साक्षी की प्रतीक्षा नहीं करता — यहाँ केवल ज्वालामुखीय रसायन, प्राचीन पाषाण, और एक एकाकी शिकारी की उपस्थिति है, जो करोड़ों वर्षों से इसी मौन में जीवित है।