साइफोनोफोर शिकार पर्दा
मध्य-गहरी जैवदीप्ति

साइफोनोफोर शिकार पर्दा

समुद्र की सतह से पाँच सौ से सात सौ मीटर नीचे, जहाँ सूर्य का प्रकाश एक क्षीण, मृतप्राय नीले आभास में सिमट आता है और दाब प्रति वर्ग सेंटीमीटर पचास वायुमंडल से अधिक हो जाता है, वहाँ एक विशालकाय सिफ़ोनोफ़ोर अपना अदृश्य साम्राज्य फैलाए हुए है — यह एकल जीव नहीं, बल्कि सैकड़ों ज़ूऑइड्स की एक समन्वित जैव-उपनिवेश है जो मिलकर दसियों मीटर लंबा एक भोजन-पर्दा रचती है। उसके काँच-पारदर्शी तंतुजाल — तेंटिला — जल-स्तंभ में तिरछे विस्तृत हैं, इतने महीन कि खुली आँख उन्हें देख न पाए, किंतु जब-जब फ़िरोज़ी जैवदीप्ति की लहर उस उपनिवेश के तने के साथ दौड़ती है, तब वह पूरा अदृश्य जाल एक क्षण के लिए ठंडी विद्युत-नाड़ियों की भाँति प्रकट हो उठता है। जहाँ कोई सूक्ष्म शिकार — कोपेपॉड या लार्वल मछली — उन तंतुओं से स्पर्श करता है, वहाँ नीली-हरी चिनगारियाँ फूट पड़ती हैं, यह स्पर्श-प्रेरित बायोल्युमिनेसेंस एक रासायनिक प्रतिरक्षा और शिकार-संकेत दोनों एक साथ है। दूर पृष्ठभूमि में एक वाइपरफ़िश की मद्धिम रूपरेखा अपने पेट के किनारे फ़ोटोफ़ोर्स की एक शांत पंक्ति लिए तैरती है, यह स्मरण दिलाती है कि इस संधि-प्रकाश क्षेत्र में जीवन प्रकाश उत्पन्न करके ही जीता है — बिना किसी बाहरी साक्षी के, बिना किसी ऊपरी संसार की जानकारी के, पूर्णतः अपनी शर्तों पर।

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