तूफान में झाग की लकीरें
तूफानी सतह

तूफान में झाग की लकीरें

आंधी में घिरा समुद्र का यह ऊपरी सतह-स्तर पृथ्वी के सबसे जीवंत और उग्र भौतिक परिवेशों में से एक है, जहाँ वायु और जल के बीच की सीमा पर ऊर्जा का स्थानांतरण इतनी तीव्रता से होता है कि लहरों की शिखाएँ टूटकर हवा में बिखर जाती हैं और मोटे हाथी-दाँत रंग के झाग की लंबी समानांतर पट्टियाँ — जिन्हें लैंगमुइर परिसंचरण द्वारा निर्मित विंडरो कहते हैं — बोतल-हरे जल पर धारियों में फैल जाती हैं। तूफ़ानी पवन के थपेड़ों से सतह की ऊपरी कुछ सेंटीमीटर परत वायु-बुलबुलों और बिखरी झाग से दूधिया हो जाती है, जबकि उससे नीचे का जल गहरे हरे-काले रंग में डूबा रहता है — यह बुलबुले-भरी परत ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के सघन आदान-प्रदान का केंद्र बन जाती है, जो वायुमंडल और महासागर के बीच गैसीय संतुलन को नियंत्रित करती है। सघन भूरे बादलों से छनकर आती शीतल विसरित रोशनी में, टूटती लहरों की पारभासी जैतूनी-हरी धार एक क्षण के लिए दीप्त होती है और फिर बिखरी झाग में विलीन हो जाती है, जबकि हवा में तैरती नमकीन बूँदें और उड़ता स्प्रे एक धुंधले आवरण की तरह क्षितिज को धो देते हैं। यह वह संसार है जो मनुष्य की उपस्थिति के बिना सदा से ऐसे ही उफनता, टूटता और फिर से उठता रहा है — निर्जन, अदम्य और अपने में पूर्ण।

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