आँख में काली शांति
तूफानी सतह

आँख में काली शांति

समुद्र की सतह पर तूफ़ान की आँख के भीतर जो शांति होती है, वह वास्तव में कोई विराम नहीं — वह एक अस्थायी और भ्रामक स्थगन है, जहाँ चारों ओर से उठती दीवारें घने क्यूम्यूलोनिम्बस बादलों से बनी हैं और उनके बीच एक चाँदी जैसी दरार से ठंडी प्राकृतिक रोशनी नीचे उतरती है, काले जल की चिकनी उभरी सतहों पर टूटा-बिखरा धातुई प्रतिबिम्ब छोड़ती है। इस क्षण में समुद्र की ऊपरी सूक्ष्म परत — जो मात्र कुछ सौ माइक्रोमीटर मोटी है — झाग की अर्धचंद्राकार लकीरों, सूक्ष्म बुलबुलों के गुच्छों और ध्वस्त श्वेत शिखाओं के अवशेषों से आच्छादित है, जो पिछले कुछ घंटों की भयावह तरंग-ऊर्जा की स्मृति हैं। समुद्र-वायु सीमा पर यह अव्यवस्था महज़ दृश्य नहीं — यह वह स्थान है जहाँ वायुमंडल और महासागर के बीच ऊष्मा, गति और गैसों का सबसे तीव्र आदान-प्रदान होता है, जहाँ टूटती लहरें वायु के लाखों बुलबुले जल में घोलती हैं और ऑक्सीजन की मात्रा संतृप्ति के निकट पहुँच जाती है। सतह के ठीक नीचे जल गहरा, स्वच्छ और लगभग प्रकाशहीन काले-हरे रंग का है — एक ऐसा संसार जो बिना किसी साक्षी के, केवल अपनी भौतिकी और रसायन के नियमों से संचालित होता रहता है, चाहे ऊपर तूफ़ान हो या शांति।

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