समुद्री हिम घनत्व सीमा
अथाह नमकीन कुंड

समुद्री हिम घनत्व सीमा

समुद्र की अतल गहराइयों में, जहाँ दाब चार सौ से छह सौ वायुमंडल तक पहुँचता है और तापमान मात्र एक से तीन डिग्री सेल्सियस के बीच ठिठुरता है, एक विचित्र और अनंत-काल से स्थिर झील अपने अस्तित्व में लीन है — यह साधारण जल नहीं, बल्कि अत्यंत सघन और अति-लवणीय ब्राइन है, जो सामान्य समुद्री जल से दो से आठ गुना अधिक नमकीन होने के कारण तलछट की एक उथली खाई में पिघले दर्पण की भाँति स्थिर पड़ी है। इस हैलोक्लाइन — उस तीखी घनत्व-सीमा — पर ऊपर से गिरते असंख्य मैरीन स्नो के कण अचानक रुक जाते हैं और क्षैतिज दिशा में सरकने लगते हैं, मानो शून्य में एक अदृश्य कालीन बुन रहे हों, जो इस अँधेरे द्रव-तल के ऊपर एक धुँधला, लगभग प्रेतवत आवरण रच देता है। ब्राइन-पूल के किनारों पर गंधक-पीले जीवाणु-आवरण और सिम्बायोटिक सूक्ष्मजीवों से पोषित पीले-श्वेत शंबु-कालोनियाँ रासायनिक संश्लेषण की उस अद्भुत जीवन-शृंखला को जीवित रखती हैं जो सूर्य के प्रकाश की एक भी किरण के बिना फलती-फूलती है, जबकि धीमी गति से विचरते होलोथुरियन और दूर तलछट से उठते समुद्री-पंख इस दृश्य को एक स्पंदित, किंतु मौन उपस्थिति देते हैं। यह संसार न किसी के लिए प्रतीक्षा करता है, न किसी को जानता है — यहाँ केवल दाब है, अँधेरा है, रसायन है, और जीवन की वह अदम्य इच्छाशक्ति है जो पृथ्वी के सबसे अगम्य कोनों में भी अपनी लय में साँस लेती रहती है।

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