पोसीडोनिया में दिव्य किरणें
समुद्री घास के मैदान

पोसीडोनिया में दिव्य किरणें

भूमध्य सागर की इस नीलवर्णी गहराई में, जहाँ सूर्य की किरणें लगभग बारह मीटर नीचे तक पहुँचती हैं, *Posidonia oceanica* की लंबी हरी पत्तियाँ धीमी, एकताल लहरों में झूमती हैं — मानो एक जीवित प्रैरी हो जो समुद्र की साँसों के साथ साँस लेती है। ऊपर की चमकती, हिलती-डुलती सतह से सुनहरी प्रकाश-किरणें तिरछी उतरती हैं, जल में घुली हुई प्लैंक्टन-कणिकाओं को चाँदी-सी दीप्ति देती हैं और पत्तियों पर सक्रिय प्रकाश-संश्लेषण से उभरे ऑक्सीजन के बुलबुले उस रोशनी में हीरों-सी चमक बिखेरते हैं। रेत की हल्की पीली पगडंडी घास के बीच से गुज़रती है, जिस पर कॉस्टिक प्रकाश की लहरें नाचती रहती हैं, और उसके ऊपर रैसे मछलियाँ तथा युवा ब्रीम के झुंड पत्तियों के बीच से बुनते-चमकते निकलते हैं — उनके शल्कों पर नीला और हरा प्रकाश एक क्षण के लिए जम जाता है। यह उथला किनारीय तल वास्तव में एक जीवन-कक्ष है: *Posidonia* की जड़ें हज़ारों वर्ष पुरानी मात प्रवाल-संरचनाओं में गड़ी हैं, समुद्री घास का यह विस्तार कार्बन का संग्राहक है, असंख्य अकशेरुकी जीवों, मछली-शिशुओं और सेफेलोपोडों का शरणस्थल है — एक संसार जो बिना किसी साक्षी के, केवल जल, प्रकाश और जीवन की अपनी भाषा में, युगों से चला आ रहा है।

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