शीत रिसाव शंबुक सोपान
शाश्वत रात

शीत रिसाव शंबुक सोपान

सबमर्सिबल की तीखी रोशनी जैसे ही आगे बढ़ती है, अंधकार का एक छोटा-सा द्वीप प्रकट होता है — सीढ़ीदार परतों में जमे विशालकाय शंबुक और पीले-सफ़ेद क्लैम, जिनके ऊपर दूधिया जीवाणु-चादरें फैली हैं, मानो किसी रसायन-संसार की नींव हो। यहाँ सूर्य का एक भी कण नहीं पहुँचता; लगभग दो से तीन हज़ार मीटर की गहराई में जल का दबाव इतना प्रचंड है कि मानव शरीर पर सैकड़ों वायुमंडल का भार होता, फिर भी इस स्थान पर जीवन धड़कता है — सूर्य-प्रकाश से नहीं, बल्कि मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड के रासायनिक ऊर्जा-स्रोत से। मीथेन-समृद्ध द्रव समुद्र-तल से रिसते हैं और उनके ऊपर अपवर्तन की लहरदार विकृतियाँ काँच के नीचे की आग जैसी थरथराती दिखती हैं, जबकि कुछ गहरे लाल केकड़े शंबुक की दरारों के बीच धीमे चलते हैं — एकमात्र गति इस जमे हुए अंधेरे में। व्यूपोर्ट के परे केवल असीम श्याम शून्य है, और यह अनुभव इतना एकाकी है जैसे पूरे ब्रह्मांड में केवल यही एक प्रकाश-बिंदु बचा हो।

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