सांझ में तांबे की राह
शांत सतह

सांझ में तांबे की राह

ढलती शाम की नरम रोशनी में समुद्र की सतह एक विशाल दर्पण बन जाती है — तांबे और आड़ू रंग की चौड़ी पट्टियाँ लगभग स्थिर जल पर फिसलती हैं, जहाँ हवा इतनी मंद है कि बोफोर्ट पैमाने पर शून्य से एक के बीच ही ठहरी है। यह **mer d'huile** — तेल-सी चिकनी सतह — वास्तव में एक जटिल संसार है: समुद्री-सतह की सूक्ष्म परत, जो मात्र कुछ माइक्रोमीटर मोटी होती है, में घुले कार्बनिक पदार्थ, फाइटोप्लैंक्टन के लिपिड, और बैक्टीरिया की पतली झिल्ली तैरती रहती है — यही परत वायुमंडल तथा महासागर के बीच ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के महत्त्वपूर्ण आदान-प्रदान को नियंत्रित करती है। सतह के नीचे पहले कुछ मीटरों की नीली-धूसर पारदर्शिता में बारीक निलंबित कण धीरे-धीरे बहते हैं, और सूर्य की तिरछी किरणें जल में प्रवेश करते ही कोमल प्रकाश-जाल बुनती हैं जो कहीं-कहीं क्षणभर के लिए दिखते और खो जाते हैं। यह सतह पृथ्वी के जलवायु तंत्र की एक जीवंत सीमा है — मौन, विशाल, और हमारी किसी भी उपस्थिति से सर्वथा निरपेक्ष।

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