वाइपरफिश लालटेन पंक्ति
मध्य-गहरी जैवदीप्ति

वाइपरफिश लालटेन पंक्ति

समुद्र की सतह से पाँच सौ से सात सौ मीटर नीचे, जहाँ सूर्य का प्रकाश एक धुँधले नीले आवरण में सिमटकर लगभग विलीन हो जाता है, वहाँ मध्य-जल का यह गलियारा असीम शांति और हाड़ कँपाने वाली ठंड में डूबा रहता है। इस क्षेत्र में जलदाब लगभग पचास से सत्तर वायुमंडल तक पहुँच जाता है, और वाइपरफ़िश — *Chauliodus sloani* — अपने विशाल काँचनुमा नेत्रों और सुई जैसे दाँतों के साथ जल-स्तंभ में लगभग स्थिर लटकी रहती हैं, मानो समय स्वयं यहाँ रुक गया हो। उनकी ठुड्डी से लटकता बार्बेल-लालटेन एक शीतल नीले-हरे बिंदु की तरह दमकता है — यह जीवित प्रकाश है, जो रासायनिक अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न होता है और शिकार को अँधेरे में लुभाने का एकमात्र उपकरण है। उनके पार्श्व भाग पर फ़ोटोफ़ोर्स की मद्धिम पंक्तियाँ तारों की आकाशगंगा जैसी झिलमिलाती हैं, जो सहजातियों को पहचान का संकेत देती हैं और इस अथाह अंधकार में जीवन की उपस्थिति का एकमात्र प्रमाण बनती हैं। चारों ओर मरीन स्नो — कार्बनिक कणों की वह मंद वर्षा — निर्बाध रूप से नीचे की ओर बहती रहती है, और यह संसार, बिना किसी साक्षी के, अपनी पूर्ण और गहन सत्ता में विद्यमान रहता है।

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