चाँदनी झाग पथ
तूफानी सतह

चाँदनी झाग पथ

समुद्र की सतह पर आज रात कोई साक्षी नहीं है — केवल वायु, जल, और चंद्रमा का टूटा हुआ प्रकाश। प्रचंड वायु-वेग के कारण तरंग-शिखर अपनी ऊँचाई से कट-कट कर बिखर जाते हैं, और झाग की लंबी धारियाँ — जिन्हें स्पिंड्रिफ्ट कहते हैं — अंधकारमय कोबाल्ट-नीले जल पर नीचे की ओर वायु की दिशा में दौड़ती हैं, मानो समुद्र ने स्वयं को चाँदी की लकीरों से लिख दिया हो। बादलों की दौड़ के बीच जब चंद्रमा क्षण-भर प्रकट होता है, तो उसकी शीतल रोशनी तरंग-शिखरों को धात्विक चाँदी से रँग देती है, जबकि गर्त गहरे नील-काले अंधकार में डूब जाते हैं — यह प्रकाश-छाया का वह द्वंद्व है जो समुद्र की यांत्रिक ऊर्जा और वायुमंडल के बीच के उस जटिल संपर्क-बिंदु को उजागर करता है, जहाँ ताप, गति, लवण-कण और गैसें आपस में विनिमय करती हैं। टूटती तरंगों के नीचे बुलबुलों के श्वेत मेघ क्षण-भर झिलमिलाते हैं — ये बुलबुले वायुमंडलीय ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड को गहरे जल में घोलने का काम करते हैं, जो पृथ्वी की जलवायु के नियमन में एक मौन परंतु अपरिहार्य भूमिका निभाते हैं। यह संसार बिना किसी दृष्टा के सदा से यूँ ही था, और यूँ ही रहेगा — तूफ़ानी, अथाह, और अपने-आप में सम्पूर्ण।

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