प्लेट प्रवाल बालकनी
सूर्य-प्रकाशित सतही जल

प्लेट प्रवाल बालकनी

उष्णकटिबंधीय समुद्र की सतह के निकट, जहाँ सूर्य का प्रकाश जल की परतों को भेदता हुआ सीधे मूँगे की चट्टानों तक पहुँचता है, चपटे मेज़नुमा मूँगे एक-दूसरे के ऊपर परत-दर-परत फैले हुए हैं — जीवित पत्थर की छतरियाँ, जिनकी ऊपरी सतह हल्के सुनहरे और मटमैले क्रीम रंग में नहाई हुई है, जबकि उनका निचला भाग ठंडी फ़िरोज़ी छाया में विलीन हो जाता है। प्रत्येक प्लेट के किनारों से छनकर आती हुई रोशनी जल में जालीनुमा कौस्टिक प्रतिबिंब बुनती है, और महीन निलंबित कण परिवेशी प्रकाश में तैरते हुए इस नीले-हरे जलस्तंभ को जीवंत गहराई देते हैं। नारंगी-गुलाबी आभा वाले एंथियास मछलियों के झुंड मूँगे की थालियों के ऊपर निलंबित हैं, मानो गहरे नील जल में दीप्तिमान अंगारे हों, जबकि चमकीले हरे-नीले रंग की रासे मछलियाँ प्लेटों के बीच की संकरी दरारों में फुर्ती से विचरती हैं। यह वही प्रकाशीय क्षेत्र है जहाँ सूर्य का प्रकाश प्रकाश-संश्लेषण को संभव बनाता है, जहाँ दबाव अभी केवल कुछ वायुमंडल का है, और जहाँ समुद्र अपनी सर्वाधिक उत्पादक, सर्वाधिक जीवंत और सर्वाधिक प्रकाशमान अवस्था में विद्यमान है — बिना किसी साक्षी के, अपने आप में पूर्ण।

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