गोधूलि में सरगासम किनारा
पेलाजिक झुंड

गोधूलि में सरगासम किनारा

सूर्यास्त की अंतिम किरणों में सार्गासम घास की तैरती चटाई के ठीक नीचे, स्नॉर्कलर की दृष्टि एक ऐसे जीवंत संसार में उतरती है जहाँ सुनहरी और ताम्र-लाल रोशनी टूटी हुई caustic धारियों में भूरे-अंबर रंग के शैवाल-फ्रॉन्ड्स और गोल गैस-ब्लैडर्स पर बिखरती है। इस अर्ध-प्रकाशित, अर्ध-रहस्यमय परत में — जहाँ समुद्र की सतह से महज आधा मीटर नीचे जल-दाब अभी नगण्य है और प्रकाश अपनी अधिकतम जैविक ऊर्जा लिए होता है — किशोर जैक मछलियों का एक विशाल समूह सार्गासम की छाया में एकत्रित है, हज़ारों चाँदी-से शरीर लगभग एक ही क्षण में मुड़ते और चमकते हैं, जो सामूहिक व्यवहार का वह अद्भुत रूप है जिसे वैज्ञानिक "स्कूलिंग" कहते हैं — शिकारियों को भ्रमित करने की क्रमिक-विकास से जन्मी रणनीति। चटाई के बाहरी किनारे पर माही-माही अपनी इंद्रधनुषी हरी-सुनहरी पीठ लिए तीव्र वेग से गुज़रती है, जबकि सुई-मछलियाँ सतह के दर्पण को छूती हुई दौड़ती हैं, उनके लंबे जबड़े डूबते सूरज की रोशनी में चमकते हैं — यह दृश्य उस एपिपेलेजिक क्षेत्र की जैव-विविधता का प्रमाण है जो पृथ्वी के समुद्री उत्पादन का सर्वाधिक सक्रिय केंद्र है। नीचे केवल नीला-हरा अनंत फैला है, कोई तल नहीं, बस खुले महासागर की वह मौन विशालता जो मनुष्य को अपनी क्षुद्रता का बोध कराती है।

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